हैदराबाद में आयोजित हुआ महिला पत्रकारों का राष्ट्रीय सम्मेलन, महिला पत्रकारों के उत्पीड़न , सुरक्षा व कई मुद्दों को लेकर प्रस्ताव पारित।
देहरादून। महिला पत्रकारो के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन से हिस्सा लेकर हैदराबाद से नई ऊर्जा और संकल्प के साध महिला पत्रकारों का दल लौट आया है। उक्त सम्मेलन मे उत्तराखंड की दो महिला पत्रकारों ज्योति भट्ट ध्यानी व रक्षा शर्मा का सानिध्य रहा। सम्मेलन से मैं सिर्फ लौटी नहीं हूँ, बल्कि एक नई दृष्टि और नए हौसले के साथ आई हूँ। मुझे इस सम्मेलन मे मीडिया जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, उनकी चुनौतियाँ और उनके साहसिक अनुभवों को करीब से जानने का मौका मिला। इस सम्मेलन से लौटने के बाद एक बात साफ है कि महिला पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं लिख रहीं, बल्कि वे समाज की सोच को बदल रही हैं। फील्ड की चुनौतियों से लेकर न्यूजरूम के संघर्षों तक, हर मोर्चे पर उनकी गूंज सुनाई दे रही है। सम्मेलन के मंच पर जब देश भर से आईं जांबाज महिला पत्रकारों को सुना तो गर्व हुआ कि विपरीत परिस्थितियों में भी सच के साथ खड़े रहने का उनका हौसला यह याद दिलाता है कि हमारी कलम में कितनी ताकत है।
हैदराबाद के होटल टूरिज्म प्लाजा में इस सम्मेलन को आयोजित करने मे इन्डियन जर्नलिस्ट यूनियन (आईजेयू) व तेलंगाना यूनियन वर्किंग ऑफ जर्नलिस्ट की महत्ती भूमिका रही है। जिन्होने देशभर की महिला पत्रकारों की आवाज को एक मंच प्रदान किया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र मे वहां की पंचायत राज एवं महिला, बाल कल्याण मंत्री दानसारी अनसूया ने अपने बेवाक अन्दाज मे कहा कि हर महिला को सवाल पूछने, असहमति जताने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने महिला पत्रकारों की सुरक्षा और उनके पेशेवर अधिकारों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपना काम करने के लिए किसी भी महिला को डराया-धमकाया नहीं जाना चाहिए या उसके खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं कर्नाटक मीडिया अकादमी की चेयरपर्सन आयशा खानम ने तेलंगाना को अलग राज्य बनाने के आंदोलन को कवर करने के अपने दिनों को याद किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला पत्रकारों को स्वय अपनी जगह बनानी चाहिए और अपने अधिकारों की सक्रिय रूप से रक्षा करनी चाहिए। खास बात यह रही कि पुलिस कमिश्नर सुमति ने पत्रकारिता में लोकतंत्र, नेतृत्व और व्यावसायिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने महिला पत्रकारों से नेतृत्व की भूमिका निभाने और अलग-अलग विचारों का सम्मान करते हुए निडर होकर रिपोर्टिंग करने का आह्वान किया। दो दिन तक चलने वाले महिला पत्रकारों के इस राष्ट्रीय सम्मेलन में समान वेतन, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानून के सख्त क्रियान्वयन और ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग उठाई गई।
सम्मेलन में कार्यस्थल पर भेदभाव, पेशेवर सुरक्षा और संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा के बाद केंद्र और राज्य सरकारों, पुलिस तथा मीडिया संस्थानों से महिला पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और समानता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन में सभी मीडिया संस्थानों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई। इसके तहत आंतरिक शिकायत समितियों को प्रभावी बनाने और उनमें योग्य बाहरी लैंगिक विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महिला पत्रकारों की सुरक्षा एवं न्याय के लिए स्वतंत्र प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। सम्मेलन में दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न और विगत सितंबर माह में एक पुलिस थाने में महिला ग्राउंड रिपोर्टरों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट की घटनाओं की निंदा की गई। इन मामलों में स्वतंत्र जांच कराने, जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई।
महिला पत्रकारों ने राजनीतिक नेताओं, कॉरपोरेट संस्थाओं और आपराधिक समूहों की ओर से मिलने वाली धमकियों तथा डराने-धमकाने की घटनाओं से सुरक्षा के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी जोर दिया। पत्रकारों की शिकायतों के निपटारे के लिए पुलिस में विशेष प्रकोष्ठ बनाने और शारीरिक धमकियों या प्रतिशोधात्मक मुकदमों का सामना कर रहे पत्रकारों को सरकारी खर्च पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। महिला पत्रकारों को निशाना बनाकर साइबर पीछा करने, निजी जानकारी सार्वजनिक करने, तस्वीरों से छेड़छाड़ करने और डीपफेक सामग्री प्रसारित करने जैसी घटनाओं पर सम्मेलन ने चिंता जताई। ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष साइबर अपराध इकाइयां बनाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की गई। मीडिया संस्थानों से महिला पत्रकारों को साइबर सुरक्षा उपकरण, डिजिटल खतरों की निगरानी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया। खास तौर पर डिजिटल और खोजी पत्रकारिता करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
महिला पत्रकारो के इस सम्मेलन मे देश के अन्य राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, लद्दाख , काश्मीर, तमिलनाडु, ओडिशा, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर-प्रदेश,महाराष्ट्र आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, बिहार , झारखंड से महिला पत्रकारो ने बढचढकर हिस्सा लिया।
– हैदराबाद से लौटकर ललिता बलूनी
